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News India Live, Digital Desk : अगर आप कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं या आपके बच्चे हायर एजुकेशन (Higher Education) में जाने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत मायने रखती है। हम दशकों से सुनते आ रहे हैं कि यूनिवर्सिटीज को UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) चलाता है, इंजीनियरिंग कॉलेजों के नियम AICTE बनाता है और टीचर्स की पढ़ाई NCTE देखता है।इतने सारे नाम और इतने सारे अलग-अलग नियम! कई बार कॉलेज भी कंफ्यूज और छात्र भी परेशान।लेकिन अब, भारत सरकार इस पूरी उलझन को खत्म करने जा रही है। ख़बरों की मानें तो संसद के शीतकालीन सत्र (Winter Session) में सरकार एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बिल लाने की तैयारी में है— HECI Bill (Higher Education Commission of India)।आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि यह माजरा क्या है और इससे आप पर क्या असर पड़ेगा।क्या है यह HECI और क्यों हो रही है इसकी चर्चा?सरल शब्दों में कहें तो, HECI भारत की उच्च शिक्षा का ‘सुपर पावर’ या ‘सिंगल रेगुलेटर’ होगा। अभी हमारे देश में उच्च शिक्षा को संभालने के लिए कई अलग-अलग संस्थाएं (UGC, AICTE, NCTE) हैं। नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत सरकार का प्लान है कि इन सबको हटाकर (Replace करके) एक ही संस्था बनाई जाए—HECI.इसका मतलब है— “वन नेशन, वन एजुकेशन रेगुलेटर।”छात्रों और कॉलेजों को क्या फायदा होगा?सरल नियम: अभी यूनिवर्सिटी को ग्रांट (पैसे) के लिए किसी और के पास जाना पड़ता है और मान्यता के लिए किसी और के पास। HECI आने के बाद सब कुछ एक ही छत के नीचे होगा।कागजी कार्रवाई कम: सिस्टम फ़ास्ट होगा। नए कॉलेज खोलने या नए कोर्स शुरू करने की परमिशन जल्दी मिलेगी, जिसका सीधा फायदा छात्रों को होगा।पारदर्शिता (Transparency): जब एक ही संस्था पूरी कमान संभालेगी, तो कॉलेजों की मनमानी कम होगी और पढ़ाई का स्तर सुधरेगा।कब तक लागू हो सकता है?मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि शिक्षा मंत्रालय इस बिल को संसद के शीतकालीन सत्र (नवंबर-दिसंबर) में पेश कर सकता है। अगर यह बिल पास हो गया, तो यह आज़ादी के बाद भारतीय शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ा प्रशासनिक बदलाव होगा।हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि मेडिकल और लीगल एजुकेशन (कानून की पढ़ाई) को शायद इससे अलग रखा जाए, क्योंकि उनके अपने अलग और जटिल नियम होते हैं। लेकिन बाकी सब कुछ—आर्ट्स, साइंस, मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग—अब HECI के दायरे में आ सकता है।
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