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News India Live, Digital Desk : भारत के न्यायपालिका के इतिहास में आज का दिन बेहद खास है। हम अक्सर फिल्मों में देखते हैं कि एक साधारण परिवार का लड़का अपनी मेहनत और लगन से आसमान की ऊंचाइयों को छू लेता है। लेकिन असल जिंदगी में ऐसी कहानियां कम ही सुनने को मिलती हैं। ऐसी ही एक जीती-जागती मिसाल हैं— जस्टिस सूर्य कांत (Justice Surya Kant)।आज जब पूरा देश उन्हें भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (53rd CJI) के रूप में देख रहा है, तो हर किसी के मन में यह सवाल है कि आखिर वो कौन हैं? कहाँ से आए हैं? और उन्होंने कितनी पढ़ाई की है?तो चलिए, एक ‘प्रोफाइल’ से हटकर, उनकी प्रेरणादायक कहानी को आसान भाषा में जानते हैं।एक साधारण परिवार और मिट्टी से जुड़ा बचपनजस्टिस सूर्य कांत का जन्म चांदी का चम्मच लेकर नहीं हुआ था। उनका जन्म हरियाणा के हिसार जिले के एक बहुत ही साधारण किसान परिवार (Farming Family) में हुआ। उनका बचपन गांव की पगडंडियों और खेतों के बीच बीता। यही वजह है कि उनकी सोच में आज भी जमीन से जुड़े आम आदमी का दर्द झलकता है।कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए CJI? (Educational Qualification)अक्सर हमें लगता है कि सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचने के लिए विदेशी डिग्री या बड़े शहरों के महंगे कॉलेजों की ज़रूरत होती है। लेकिन जस्टिस सूर्य कांत ने इस मिथक को तोड़ दिया है।शुरुआती पढ़ाई: उन्होंने अपनी शुरूआती पढ़ाई हिसार के ही गांव के स्कूल से की।ग्रेजुएशन: साल 1981 में उन्होंने हिसार के गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरी की।वकालत की पढ़ाई (Law): इसके बाद उन्होंने रोहतक की मशहूर महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU, Rohtak) से 1984 में एलएलबी (LLB) की डिग्री हासिल की।यानी उनकी पूरी शिक्षा-दीक्षा हरियाणा की माटी में ही हुई है। यह उन लाखों छात्रों के लिए एक प्रेरणा है जो छोटे शहरों के सरकारी कॉलेजों में पढ़ते हैं।डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से शुरू किया सफर (Career Journey)एलएलबी करने के तुरंत बाद, उन्होंने 1984 में हिसार के जिला न्यायालय (District Court) में वकालत शुरू की। सोचिये, जिस वकील ने अपनी जर्नी एक छोटे से जिले की कोर्ट से शुरू की हो, आज वो देश की सबसे बड़ी अदालत का मुखिया है।1985 में वो चंडीगढ़ शिफ्ट हो गए और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। अपनी मेहनत और कानून की समझ के दम पर वो साल 2000 में हरियाणा के सबसे कम उम्र के एडवोकेट जनरल (Advocate General) बने। यह अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी।आम आदमी की उम्मीदजस्टिस सूर्य कांत को एक बेबाक और जन-हितैषी जज माना जाता है। हाई कोर्ट के जज से लेकर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के जज बनने तक—उनका हर फैसला काबिल-ए-तारीफ रहा है
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